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Thursday 27th of July 2017
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इंटरनेट का इस्तेमाल जरूरी है मगर कैसे किया जाए?

अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी अबना: हमारे समाज में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का ट्रेंड लगातार बढ़ता जा रहा है मर्द और औरत जवान और नौजवानों की जिंदगी का अधिकतर वक्त वर्चुअल दुनिया में गुजर रहा है इंटरनेट की बदौलत आज पूरी दुनिया सिमट कर इंसान की जेब में आ चुकी है इसमें कोई शक नहीं कि इंसान की जिंदगी के विकास में इंटरनेट की बड़ी भूमिका है इस सुविधा ने जिंदगी के सभी डिपार्टमेंट में काम को आसान बना दिया है रिसर्च करने वाले लेटेस्ट टेक्नोलॉजी द्वारा कुछ मिनटों में बहुत ज्यादा जानकारियां हासिल कर सकते हैं इंटरनेट से इस्तेमाल तो सभी लोग करते हैं मगर सबके उद्देश अलग-अलग होते हैं मौलिक रुप से हम इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों को दो गुटों में विभाजित कर सकते हैं एक गुट वह है जो उसे अच्छी मालूमात हासिल करने का माध्यम समझता है और वह सच्चाई से आगाह होता है कि इंसान की जिंदगी में सबसे कीमती चीज वक्त है और इंटरनेट वक्त के बचाव का बेहतरीन माध्यम है इसलिए वह उससे फायदा उठाते हैं और कम समय में अच्छी और लाभदायक मालूमात हासिल कर लेते हैं संरचनात्मक दृष्टिकोण और अच्छी सोच को हासिल कर लेते हैं धार्मिक जानकारियों कुरान और हदीसों के बारे में बड़े-बड़े जीनियस कॉलर्स के लिखे हुए आर्टिकल्स मैगजीन और किताबें ऑनलाइन पढ़ते हैं जिंदगी में पेश आने वाले जरूरी शायरी मशीनों के अहकाम सर्च करके निकाल लेते हैं फिर उनको पढ़ते हैं उन पर गौर करते हैं दूसरे धर्मों के बारे में जानकारी हासिल करते हैं उनके विश्वासों और सिद्धांतों को मालूम करते हैं समाज के विभिन्न मसलों का हल ढूंढ़ते हैं शारारिक और अध्यात्मिक बीमारियों के इलाज के नुस्खे ढूंढते हैं जिसके नतीजे में उनकी सोच डेवलप होती है और हर चीज को आंखें बंद करके रोल करने के बजाए फिर माल और तर्क के पीछे दौड़ते हैं यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि जब लोग अधिकतर पर मजबूत हो जाएं तो उनके निकट लॉजिक और तर्क हर चीज का मापदंड बन जाएगा बहुत जल्दी कामयाबी के रहस्य से अवगत हो जाएंगे उनमें जिंदगी की तमाम समस्याएं चाहे धार्मिक हो या भौतिक में नफ़ा और नुकसान को समझने की क्षमता पैदा हो जाती है गलत और सही विश्वासों के बीच अंतर करने की योग्यता भी पैदा हो जाती है उनको इस्लाम दुश्मन तत्वों की चालों षड्यंत्रों प्रोपेगंडा को समझने में कोई मुश्किल पेश नहीं आती और दूसरा गुट वह है जो इंटरनेट नकारात्मक चीजों के लिए इस्तेमाल करता है उस पर गाने सुनता है गंदी फिल्में देखता है नंगी तस्वीरें देखता है गंदी बातें सुनता है गुमराह करने वाली बातों में पड़ता है
नतीजा यह निकला कि जो लोग बुरे रास्ते में पड़ जाते हैं और कुछ समय बाद उनके मन में बुरी सोचे एक मजबूत पेड़ का रूप धारण कर लेती हैं और वह गुमराही के दलदल में फंस जाए और बेलगाम ऊंट की तरह शैतानी सोचो की दुनिया में दौड़ने को वह कामयाबी समझते हैं दीन और अच्छी बातों को वह किस्सा-कहानी कहते हैं बल्कि धार्मिक लोगों का मजाक उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। आज इस्लामी देशों में इंटरनेट का गलत इस्तेमाल करने वालों की कमी नहीं। अश्लीलता के लिए अब यूरोप की नहीं मुस्लिम देशों की मिसाल देना काफी है हमारे देश में बेशर्मी और अश्लीलता दिन ब दिन बढ़ती जा रही है इंटरनेट पर बिना झिझक अश्लीलता और नंगापन अश्लील पिक्चर्स और वीडियो देखना जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है। नौजवान पीढ़ी इस बीमारी में ज्यादा ग्रस्त दिखाई देती है जिसकी बेसिक वजह इस्लामी प्रशिक्षण का अभाव और पश्चिमी कल्चर से जवानों का प्रभावित होना है। इस अपराध में वह मां बाप भी शरीक हैं जो अपनी औलाद के प्रशिक्षण पर ध्यान नहीं देते हैं बच्चों को पढ़ाने के साथ साथ उनका सही प्रशिक्षण भी मां-बाप की जिम्मेदारी है इस सिलसिले में इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम फरमाते हैं तुम्हारी संतान का यह तुम पर अधिकार है कि तुम उस पर ध्यान दो कि वह बुरी है या अच्छी, वो तुम ही से वजूद में आई है और इस दुनिया में वह तुमसे ही मंसूब है और तुम्हारी जिम्मेदारी है कि तुम उसे आदर सिखाओ अल्लाह की पहचान कराओ उसकी सही रहनुमाई करो अल्लाह की बातों की पैरवी करने में उसकी मदद करो अपनी संतान के साथ तुम्हारा व्यवहार ऐसे इंसान की तरह होना चाहिए जिससे उसे यकीन होता हो कि परोपकार के बदले में उसे अच्छा पुण्य मिलेगा और बुरे व्यवहार के बदले में उसे सजा दी जाएगी बच्चों में गुड लक और बैड लक दोनों की योग्यता मौजूद होती है अब यह मां-बाप पर निर्भर है कि वह अपनी संतान का अच्छा प्रशिक्षण करके अच्छा इंसान बनाते हैं या उसे एक घटिया दर्जे का जानवर बना कर समाज के हवाले करते हैं इस सिलसिले में आयतुल्लाह इब्राहिम अमीनी साहब अपनी किताब में लिखते हैं हर इंसान के सौभाग्य और दुर्भाग्य का संबंध मां-बाप का प्रशिक्षण है इसीलिए इस महत्वपूर्ण काम की जिम्मेदारी मां-बाप के कंधों पर डाली गई है सब से अहम काम जो मां बाप अपने बच्चों के लिए कर सकते हैं वह यह है कि उसे सुशील, मेहरबान, नेकदिल, इंसान दोस्त, आजाद, बहादुर, न्याय पसंद, समझदार, अच्छे काम करने वाला, शरीफ, मेहनती, पढ़ा लिखा बना सकते हैं और जो मां बाप अपने बच्चों के प्रशिक्षण की तरफ ध्यान नहीं देते बल्कि अपने रहन-सहन और आचरण से उन्हें गुमराह कर देते हैं वह बहुत बड़ा अपराध करते हैं आज के बच्चे ही कल का भविष्य हैं कल का समाज उन्ही से बनेगा आज जो सीखेंगे कल उसी पर अमल करेंगे अगर उनका प्रशिक्षण सही हो गया तो कल का समाज एक पूर्ण और सही समाज होगा और अगर आज की नस्ल ने गलत प्रोग्राम के अधीन होकर प्रशिक्षण पाया तो जरूरी है कि कल का मुआशरा खराब और बदतर होगा कल की राजनीतिक शैक्षणिक और सामाजिक हस्तियां उन्हीं से वजूद में आएंगी आज के बच्चे कल के मां बाप हैं आज के बच्चे कल के फिर शिक्षक बनेंगे और अगर उन्होंने अच्छा प्रशिक्षण पाया होगा तो अपने बच्चों को भी वैसा ही बना लेंगे और इस तरह एक अच्छा समाज उभरकर सामने आएगा वरना इसके विपरीत होगा जिस के नतीजे बहुत बुरे होंगे।

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