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Thursday 21st of September 2017
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यमन हमलों में ज़ायोनी शासन की सऊदी अरब के साथ भागीदारी।

मीडिया सूत्रों ने यमन जंग और तइज़ पर बमबारी में ज़ायोनी सेना की सऊदी अरब के साथ भागीदारी की ओर इशारा करते हुए बताया कि रियाज़ ने इस बात को स्वीकार किया है कि यमन के क्रान्तिकारियों की दमन के लिए उसे इस्राईल की सेना की ज़रूरत है।
ब्रितानी वेबसाइट लिबर्टी फ़ाइटर्ज़ के हवाले से अलआलम के अनुसार, सऊदी सेना के प्रवक्ता अहमद अलअसीरी ने कहा कि इस्राईली वायु सेना के एक दस्ते ने यमन के तइज़ प्रांत में अंसारुल्लाह के एक ट्रेनिंग कैंप पर हमले के साथ अपना अभियान शुरु किया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, अलअसीरी ने उम्मीद जतायी कि इस्राईली सेना के साथ सऊदी सेना का सहयोग जारी रहेगा और इस प्रकार सऊदी अरब-इस्राईल के बीच संबंध का नया अध्याय खुलेगा।
ग़ौरतलब है कि सऊदी अरब का अमरीका और पश्चिमी देशों की मदद से यमन पर 26 मार्च 2015 से सऊदी अरब का अतिक्रमण जारी है। सऊदी अरब की बमबारी के कारण बहुत से अस्पताल, क्लिनिक और स्वास्थ्य सेवा केन्द्रों की इमारतें ध्वस्त हो चुकी हैं और इस देश के 80 फ़ीसद से ज़्यादा मूल ढांचे तबाह हो चुके हैं।
सऊदी अरब की बमबारी में अब तक यमन में 11000 से ज़्यादा बेगुनाह नागरिक मारे गए, दसियों हज़ार घायल हुए और लाखों बेघर हो चुके हैं।

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