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Wednesday 22nd of November 2017
Articles

ईरान में रसूल स. और नवासए रसूल स. के ग़म में मजलिसें और जुलूस

अहलेबैत (अ )न्यूज़ एजेंसी अबना :  प्राप्त सूत्रों के अनुसार इस्लामी राष्ट्र ईरान में रसूले खुदा हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स. के निधन एवं इमाम हसन अलैहिस्सलाम की शहादत के ...

इमाम हसन(अ)की संधि की शर्तें

1- माविया को इस शर्त पर सत्ता हस्तान्त्रित की जाती है कि वह अल्लाह की किताब (कुरऑन ) पैगम्बर व उनके नेक उत्तराधिकारियों की शैली के अनुसार कार्य करेगा।2- माविया के बाद सत्ता ...

पैग़म्बरे इस्लाम (स.) के वालदैन

आपके वालिद हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्दुल मुत्तलिब हैं। हज़रत अब्दुल्लाह वह इंसान हैं जो खानदानी शराफ़त के एतेबार से दुनिया भर में मुमताज़ हैं। हज़रत अब्दुल्लाह के ...

हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम

माता पिताहज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम के पिता हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम तथा आपकी माता हज़रत फ़ातिमा ज़हरा थीं। आप अपने माता पिता की प्रथम संतान थे।जन्म तिथि व जन्म ...

हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम का जीवन परिचय

नाम व अलक़ाब (उपाधियाँ) :    अल-मुज्तबा, अबू मोहम्मद (1)माता पिता :    हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम के पिता हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम तथा आपकी माता हज़रत फ़ातिमा ज़हरा ...

इमाम हसन (अ) के दान देने और क्षमा करने की कहानी।

एक दिन इमाम हसन (अ) घोड़े पर सवार कहीं जा रहे थे कि शाम अर्थात मौजूदा सीरिया का रहने वाला एक इंसान रास्ते में मिला। उस आदमी ने इमाम हसन को बुरा भला कहा और गाली देना शुरू कर ...

पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद (स.अ:व:व) का जीवन परिचय

नाम व अलक़ाब (उपाधियाँ)आपका नाम मुहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह व आपके अलक़ाब मुस्तफ़ा, अमीन, सादिक़,इत्यादि हैं। माता पिताहज़रत पैगम्बर के पिता का नाम अब्दुल्लाह था जो ;हज़रत ...

ईरान में श्रद्धा पूर्वक मनाया गया इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का चेहलुम।

अहलेबैत (अ )न्यूज़ एजेंसी अबना :प्राप्त सूत्रों के अनुसार समस्त ईरान में रसूल अल्लाह स. के नवासे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का चेहलुम श्रद्धा पूर्वक  मनाया गया। इस्लामी ...

विश्व की सबसे लंबी नमाज़े जमाअत नजफ़ से कर्बला तक

अहलेबैत (अ )न्यूज़ एजेंसी अबना : नोन न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ वर्षों की तरह इस वर्ष भी विश्व की सबसे बड़ी नमाज़ नजफ़े अशरफ़ और कर्बला ए मोअल्ला के बीच हुई ...

शांतिपूर्वक रवां दवां अरबईन मिलियन मार्च

अहलेबैत (अ )न्यूज़ एजेंसी अबना :प्राप्त सूत्रों के अनुसार इराक़ के पवित्र शहर कर्बला ए मोअल्ला में सैय्यदुश्शोहदा हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और आपके साथियों का चेहलुम ...

चेहलुम के अवसर पर करोड़ों ज़ायरीन ने कर्बला पहुँच कर की अज़ादारी

अहलेबैत (अ )न्यूज़ एजेंसी अबना :प्राप्त सूत्रों के अनुसार सैय्यदुश्शोहदा इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चेहल्लुम में शिरकत करने के लिए करोड़ों की संख्या में ज़ायरीन कर्बला ए ...

20 सफ़र करबला के शहीदो का चेहलुम

२० सफर सन् ६१ हिजरी कमरी, वह दिन है जिस दिन हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके वफादार साथियों को कर्बला में शहीद हुए चालिस दिन हुआ था। पूरी सृष्टि चालिस दिन से हज़रत इमाम ...

करबला करामाते इंसानी की मेराज है।

करबला के मैदान में दोस्ती, मेहमान नवाज़ी, इकराम व ऐहतेराम, मेहर व मुहब्बत, ईसार व फ़िदाकारी, ग़ैरत व शुजाअत व शहामत का जो दर्स हमें मिलता है वह इस तरह से यकजा कम देखने में आता ...

ज़ियारते अरबईन की अहमियत

इमाम हसन असकरी (अ) ने फ़रमायाः पाँच चीज़ें मोमिन और शियों की निशानी हैं1. 51 रकअत नमाज़ (रोज़ाना की नमाज़ें, नाफ़ेला और नमाज़े शब)2. ज़ियारते अरबईन इमाम हुसैन (चेहलुम के दिन की ...

असबाबे जावेदानी ए आशूरा

यूँ तो ख़िलक़ते आलम व आदम से लेकर आज तक इस रुए ज़मीन पर हमेशा नित नये हवादिस व वक़ायए रुनुमा होते रहे हैं और चश्मे फ़लक भी इस बात पर गवाह है कि उन हवादिस में बहुत से ऐसे हादसे ...

पैग़ामे कर्बला

हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत के बाद से मोहर्रम केवल एक महीने का नाम नहीं रह गया बल्कि यह एक दुखद घटना का नाम है, एक सिद्धांत का नाम है और सबसे बढ़कर सत्य व असत्य, अत्याचार तथा ...

जौशन सग़ीर का तर्जमा

कुछ ख़ास मोअतबर किताबों में दुआए जौशन सग़ीर का ज़िक्र जौशन कबीर से ज़्यादा शरह के साथ आया है. कफ़'अमी ने किताब "बलदुल अमीन" के हाशिये में फ़रमाया है कीयह बहु बुलंद मर्तबा और बड़ी ...

आयतल कुर्सी का तर्जमा

2.256: दीन में किसी तरह की जबरदस्ती नहीं क्योंकि हिदायत गुमराही से (अलग) ज़ाहिर हो चुकी तो जिस शख्स ने झूठे खुदाओं बुतों से इंकार किया और खुदा ही पर ईमान लाया तो उसने वो मज़बूत ...

माहे रजब की दुआऐं

माहे रजब की दुआऐंरजब के पहले दिन और रात की मख्सूस दुआ1) हज़ूरे अकरम (स:अ:व:व) की सीरत थी की जब रजब का चाँद देखते थे तो यह दुआ पढ़ते थे:اَللّٰھُمَّ بَارِکْ لَنٰا فِی رَجَبٍ وَ شَعْبانَ وَ بَلَّغْنَا ...

नौहा

तुरबते बेशीर पर कहती थी माँ असग़र उठोकब तलक तन्हाई में सोओगे ऐ दिलबर उठोहै अंधेरा घर में नज़रों में जहाँ तारीक हैकब तलक पिन्हाँ रहोगे ए महे अनवर उठोहम सबों को कै़द करके ...