Hindi
Friday 31st of March 2017
Articles

इमामे मोहम्मदे बाक़िर अलैहिस्सलाम

रजब के मुबारक महीने की पहली तारिख़ एक बार फिर आ पहुंची है। आज ही के दिन पैग़म्बरे इस्लाम (स) के पौत्र इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम ने इस संसार में क़दम रखा। उन्होंने ...

इमाम बाक़िर और ईसाई पादरी

एक बार इमाम बाक़िर (अ.स.) ने अमवी बादशाह हश्शाम बिन अब्दुल मलिक के हुक्म पर अनचाहे तौर पर शाम का सफर किया और वहा से वापस लौटते वक्त रास्ते मे एक जगह लोगो को जमा देखा और जब आपने ...

एहसान

एहसान इंसानी समाज में बहुत कॉमन लफ़्ज़ है। एर ग़ैर मुस्लिम भी एहसान को अच्छी तरह जानता है। बस फ़र्क़ यह है कि जो एहसान का लफ़्ज़ हमारे समाज में इस्तेमाल होता है वह क़ुरआन ...

एक हतोत्साहित व्यक्ति

कभी कभी हमारे जीवन में ऐसी घटनाएं घटती हैं कि जो जाने अन्जाने हमारी भावनाओं को उक्साने का कारण बनती हैं। इनमें से एक, कि जिसका सहन करना अत्यन्त कठिन होता है, हतोत्साह नामक ...

कव्वे और लकड़हारे की कहानी।

एक बार की बात है कि एक गांव में एक ग़रीब लकड़हारा रहता था, वह प्रतिदिन जंगल से लकड़ी काट कर लाता और उन्हें बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट पालता था। लकड़हारा बहुत गरीब लेकिन ...

नाइजीरिया में सेना द्वारा इस्लामी आंदोलन के कार्यालय पर हमला, दर्जनों घायल + तस्वीरें

अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी अबनाः रिपोर्ट के अनुसार इस्लामी आंदोलन के कार्यालय पर नाइजीरियाई सेना और पुलिस के हमले में कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत चिंताजनक बनी हुई ...

जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. विलायत के आसमान का एक तारा।

क़ुरआने मजीद सूरए नहल की आयत 16 में फ़रमाता है: ’’وَ بِالنَّجمِ ھُم یَھتَدونَ‘‘बुद्धिमान वह हैं जो आसमान के तारों की सहायता से अपने रास्ते ढ़ूढ़ँते हैं और मंज़िल तक पहुँच ...

हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. की वसीयत और शहादत।

अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी अबनाः हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) ने औरतों के लिए पर्दे के महत्व को उस समय भी बयान किया जब आप दुनिया से रुख़्सत होने वाली थीं। एक दिन आप बहुत परेशान थीं तो ...

सलाह व मशवरा

कामों में दूसरों से मशवरा करो।समाजी तरक़्क़ी का एक पहलू मशवरा करना है। मशवरा यानी मिलकर फ़िक्र करना। इसमें कोई शक नही है कि जो लोग मशवरा करते हैं, उनमें अक़्ल व फ़िक्र ...

सम्मोहन एवं बुद्धिमत्ता

पुराने समय की बात है। एक माली रहता था जो सुगंधित व सुदंर फ़ुलवाड़ियों व क्यारियों की बहुत अच्छे ढंग से देखभाल करता था। वृद्ध होने के बावजूद वह प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व ...

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा

मक्का नगर पर चांदनी बिखरी थी और पूरे नगर पर मौन छाया था किंतु एसा लग रहा था जैसे महान ईश्वरीय दूत हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैही व आलेही व सल्लम के लिए समय की गति भिन्न थी। ...

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा उम्महातुल मोमिनीन की नज़र में

ख़ुदावन्दे आलम ने बज़्मे इंसानी के अंदर हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम से बेहतर किसी को ख़ल्क नहीं फरमाया। आप सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम ...

भोर में उठने से आत्मा को आनन्द एवं शान्ति प्राप्त होती है

माहे रमज़ान के पवित्र महीने में कुछ विशेष क्षण होते हैं। इन विशेष क्षणों में सबसे सुंदर क्षण सहर अर्थात भोर के समय के होते हैं। बड़े खेद के साथ कहना पड़ता है कि वर्तमान जीवन ...

बदकारी

बदकारी की सुरक्षा के लिये इस्लाम ने दो तरह के इंतेज़ामात किये हैं: एक तरफ़ इस रिश्ते की ज़रूरत और अहमियत और उसकी सानवी शक्ल की तरफ़ इशारा किया है तो दूसरी तरफ़ उन तमाम ...

बच्चों के साथ रसूले ख़ुदा (स.) का बर्ताव

ख़ुदा ने बच्चों की सूरत में अपनी एक बहुत बड़ी नेमत इंसान को अता की है और उन की सही तरबीयत और परवरिश का हुक्म दिया है क्यों कि बच्चे ही किसी क़ौम, समाज और मुल्क का फ़्युचर होते ...

पेंशन

एक नसरानी बूढ़े ने ज़िन्दगी भर मेहनत करके ज़हमतें उठाईं लेकिन ज़ख़ीरे के तौर पर कुछ भी जमा न कर सका, आख़िर में नाबीना भी हो गया। बूढ़ापा, नाबीनाई, और मुफ़लिसी सब एक साथ जमा हो ...

नमाज़ के साथ, साथ कुछ काम ऐसे हैं जो इबादत में शुमार होते हैं"

मुख्तसर तौर पर उन कामों का ज़िक्र करता हूँ। जिन्हें इबादत के खूबसूरत नाम से याद किया गया है, और जिन पर अमल उसी तरह लाज़िम है जिस तरह कि नमाज़ का अदा करना।*झूठ, गीबत,शराब और ...

ग़ीबत

ग़ीबत यानी पीठ पीछे बुराई करना है, ग़ीबत एक ऐसी बुराई है जो इंसान के मन मस्तिष्क को नुक़सान पहुंचाती है और सामाजिक संबंधों के लिए भी ज़हर होती है। पीठ पीछे बुराई करने की ...

ईरान के इंक़ेलाब का मक़सद, इस्लामी पाक व पवित्र ज़िन्दगी की तलाश थी।

रानी पब्लिक ने इस्लामी इन्क़ेलाब की कामयाबी तक हज़रत इमाम ख़ुमैनी रह. के नेतृत्व में जितने प्रयास किये या इन्क़ेलाब की कामयाबी के बाद इस देश नें जितनी मुश्किलों का सामना ...

38वें स्वतन्त्रता दिवस में करोड़ों ईरानियों ने शिरकत करके दिया ट्रम्प को मुंहतोड़ जवाब।

5 हज़ार से अधिक शहरों में करोड़ों ईरानियों ने रैलियों में शिरकत कर धूमधाम से मनाया 38 वां स्वतन्त्रता दिवस। ज्ञात रहे की पहलवी राजशाही के खिलाफ 10 फरवरी 1979 में ईरानी इस्लामी ...