Hindi
Friday 20th of October 2017
Kalam and Beliefs

तफ़्सीर बिर्राय के ख़तरात

हमारा अक़ीदह है कि क़ुरआने करीम के लिए सब से ख़तरनाक काम अपनी राय के मुताबिक़ तफ़्सीर करना है।इस्लामी रिवायात में जहाँ इस काम को गुनाहे कबीरा से ताबीर किया गया है वहीँ यह ...

तफसीरे सूराऐ फत्ह

सूरए फ़त्ह पवित्र क़ुरआन का 48वां सूरा है। यह सूरा मदीने में उतरा।  इसमें 29 आयतें है। इस सूरे के नाम से ही स्पष्ट है कि यह विजय और सफलता का संदेश दे रहा है। अरबी भाषा में ...

सूर –ए- तौबा की तफसीर 2

ताएफ़ नगर के निकट एक क्षेत्र है जहां हुनैन नाम का युद्ध हुआ।  ताएफ़वासी विशेषकर दो कबीलों एक “हवाज़न” और दूसरे “सक़ीफ़” के नाम से प्रसिद्ध थे। इस्लामी सेना ने जब ...

क़ुरआने मजीद और अख़लाक़ी तरबीयत

अख़लाक़ उन सिफ़ात और अफ़आल को कहा जाता है जो इंसान की ज़िन्दगी में इस क़दर रच बस जाते हैं कि ग़ैर इरादी तौर पर भी ज़हूर पज़ीर होने लगते हैं।बहादुर फ़ितरी तौर पर मैदान की ...

एतेमाद व सबाते क़दम

वह लोग सीसा पिलाई हुई दिवार की तरह हैं।सूरः ए सफ़ आयत न. 5नहजुल बलाग़ा में हज़रत अली अलैहिस्लाम का यह क़ौल नक़्ल हुआ हैं-يوم لک و يوم عليکएक रोज़ तुम्हारे हक़ में और दूसरा ...

सुशीलता

इस्लाम ने बातचीत में एवं व्यवहार में हमेशा अपने अनुयाइयों से नम्रता एवं भद्रता का आहवान किया है और अभद्रता एवं अशिष्टता से रोका है। इस लिए कि इस्लाम की यह शिक्षा जीवन में ...

दुआ-ऐ-मशलूल

सैय्यद इब्ने तावूस ने अपनी किताब मह्जूले-दावत में हज़रत इमाम हुसैन (अ:स) से रिवायत की है के आप फरमाते हैं की एक शब् मै अपने पदरे बुज़ुर्गवार आली मश्दार हज़रत अली इब्ने अबी ...

रहबर हुसैन हैं

भटकी हुई हयात के रहबर हुसैन हैंसेहरा हैं करबला तो समन्दर हुसैन हैंखुशबू पयामे हक की हैं सारे जहान मेंगुलज़ार-ए-मुस्तफा के गुल-ए-तर हुसैन हैंइश्क-ए-हुसैन से मेरी उक़बा संवर ...

हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के ज़ुहूर की निशानियाँ

 इमाम महदी अलैहिस्सलाम के ज़ुहूर से पहले बहुत सी निशानियां ज़ाहिर होंगी। जब आपका ज़ुहूर होगा तो पूरब व पश्चिम पर आपकी हुकूमत होगी। ज़मीन अपने सारे ख़ज़ाने उगल देगी। ...

पारिभाषा में शिया किसे कहते हैं।

 अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम की बिला फ़स्ल इमामत (अर्थात रसूले इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम के बाद, बिना किसी फ़ासले के आपको पहले नम्बर पर उनका ...

शरमिन्दगी की रिवायत

खलीफाऐ अव्वल अबुबकर बिन अबुक़हाफा एक रिवायत की बिना पर अपनी उम्र के आखरी लमहो मे तीन कामो के करने, तीन कामो के न करने, और पैग़म्बर से तीन सवालो के न पूछने से शरमिंदगी का ...

सूरा बक़रा का संक्षिप्त परिचय

  इस सूरे में 286 आयते हैं और पवित्र क़ुरआन के तीस भागों में से दो से ज़्यादा भाग इसी सूरे से विशेष हैं। पवित्र क़ुरआन के उतरने वाले सूरों के क्रमांक की दृष्टि यह 86वें नंबर पर ...

वहाबियत और मक़बरों का निर्माण

  पैग़म्बरों, ईश्वरीय दूतों और महान हस्तियों की क़ब्रों पर मज़ार एवं मस्जिद का निर्माण वह कार्य है जिसके बारे में वहाबी कहते हैं कि यह चीज़ धर्म में नहीं है और इसके संबंध ...

तक़िय्येह का फ़लसफ़ा

हमारा अक़ीदह है कि अगर कभी इंसान ऐसे मुतस्सिब लोगों के दरमियान फँस जाये जिन के सामने अपने अक़ीदेह को बयान करना जान के लिए खतरे का सबब हो तो ऐसी हालत में मोमिन की ज़िम्मेदारी ...

क़ानूनी ख़ला का वुजूद नही है

हमारा अक़ीदह है कि इस्लाम में किसी तरह का कोई क़ानूनी ख़ला नही पाया जाता। यानी क़ियामत तक इंसान को पेश आने वाले तमाम अहकाम इस्लाम में बयान हो चुके हैं। यह अहकाम कभी मख़सूस ...

इस्लाम और इँसान की सरिश्त

हमारा अक़ीदह है कि अल्लाह, उसकी वहदानियत और अंबिया की तालीमात के उसूल पर ईमान का मफ़हूम अज़ लिहाज़े फ़ितरत इजमाली तौर पर हर इँसान के अन्दर पाया जाता हैं। बस पैग़म्बरों ने ...

क़ौमी व नस्ली बरतरी की नफ़ी

हमारा अक़ीदह है कि तमाम अँबिया-ए- इलाही मख़सूसन पैग़म्बरे इस्लाम (स.) ने किसी भी “नस्ली” या “क़ौमी” इम्तियाज़ को क़बूल नही किया। इन की नज़र में दुनिया के तमाम इँसान बराबर थे ...

मआद (क़ियामत)के बग़ैर ज़िन्दगी बेमफ़हूम है

हमारा अक़ीदह है कि मरने के बाद एक दिन तमाम इंसान ज़िन्दा होगें और आमाल के हिसाब किताब के बाद नेक लोगों को जन्नत में व गुनाहगारों को दोज़ख़ में भेज दिया जायेगा और वह हमेशा ...

मआद की दलीलें रौशन हैं

हमारा अक़ीदह है कि मआद की दलीलें बहुत रौशन हैं क्यों कि- क)इस दुनिया की ज़िन्दगी इस बात की तरफ़ इशारा करती है कि ऐसा नही हो सकता कि यह दुनिया जिस में इंसान चन्द दिनों के लिए ...

क़ियामत और शफ़ाअत

हमारा अक़ीदह है कि क़ियामत के दिन पैग़म्बर,आइम्मा-ए-मासूमीन और औलिया अल्लाह अल्लाह के इज़्न से कुछ गुनाहगारों की शफ़ाअत करें गे और वह अल्लाह की माफ़ी के मुस्तहक़ क़रार ...