پایگاه اطلاع رسانی

استاد حسین انصاریان

पश्चाताप के लाभ 1

पश्चाताप के लाभ 1

पुस्तकः पश्चाताप दया की आलिंग्न

लेखकः आयतुल्ला अनसारीयान

पापो के पश्चाताप से संम्बंधित पवित्र क़ुरआन के छंदो एंव पैगंम्बर के परिवार वालो (अहलैबेत अलैहेमुस्सलाम) के कथनो के दृष्टिगत लोक एंव परलोक मे पश्चाताप के अत्यधिक लाभो का उल्लेख हुआ है, जो निम्नलिखित हैः

. . . اسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ إِنَّهُ كَانَ غَفَّاراً * يُرْسِلِ السَّماءَ عَلَيْكُم مِدْرَاراً * وَيُمْدِدْكُم بِأَمْوَال وَبَنِينَ وَيَجْعَل لَكُمْ جَنَّات وَيَجْعَل لَكُمْ أَنْهَاراً 

“... इस्तग़फ़ेरू रब्बकुम इन्नहु काना ग़फ़ूरा*  युरसेलिस्समाआ अलैकुम मिदरारा*  वा युमदिदकुम बेअमवालिन वा बनीना वा यजअल्लकुम जन्नातिन वा यजअल्लकुम अनहारा”[1]

...और आदेश हुआ कि अपने पालनहार से क्षमा मांगो क्योकि वह अत्यधिक क्षमा करने वाला है, वह तुम पर आकाश से मूसलाधार वर्षा करेगा। तथा माल एंव संतान द्वारा तुम्हारी सहायता करेगा और तुम्हारे लिए उधान (बाग़) तथा नदियां घोषित करेगा।

. . . تُوبُوا إِلَى اللَّهِ تَوْبَةً نَصُوحاً عَسَى رَبُّكُمْ أَن يُكَفِّرَ عَنكُمْ سِيِّئَاتِكُمْ وَيُدْخِلَكُمْ جَنَّات تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ . . . 

“... तूबू एलल्लाहे तौबतन नसूहन असा रब्बोकुम अय्योकफ़्फ़ेरा अनकुम सय्येआतेकुम वा युदख़ेलाकुम जन्नातिन तजरि मिन तहतेहल अनहारो ...”[2]

पश्चाताप करो, निकट भविष्य मे तुम्हारा पालनहार तुम्हारी बुराईयो को मिटा देगा तथा तुम्हारा ऐसे स्वर्ग मे प्रवेश करेगा जिसके नीचे सदैव नदिया बहती रहेंगी।

पश्चाताप से संम्बंधित अधिकांश छंद ईश्वर की दो सिफ़त ग़फ़ूर (क्षमा करने वाला) और रहीम (कृपा करने वाला) पर समाप्त होती है, जिसका अर्थ यह है कि ईश्वर सच्चे पश्चातापी पर अपनी बख़शिश तथा कृपा के द्वार खोल देता है।[3]

وَلَوْ أَنَّ أَهْلَ الْقُرَى آمَنُوا وَاتَّقَوا لَفَتَحْنَا عَلَيْهِمْ بَرَكَات مِنَ السَّمآءِ وَالاْرْضِ . . . 

“वलो अन्ना अहलल क़ुरा आमानू वत्तक़ू लफ़तहना अलैहिम बराकातिम्मिनस्समाए वलअर्ज़े...”[4]

और यदि गाव वाले इमान लेआते है और तक़वे का च्यन कर लेते है तो हम उनके लिए धरती तथा आकाश से बरकतो के द्वार खोल देंगे।

जारी



[1] सुरए नूह 71, छंद 10-12

[2] सुरए तहरीम 66, छंद 8

[3] सुरए आले इमरान 3, छंद 89; सुरए माएदा 5, छंद 34; सुरए आराफ़ 7, छंद 153; सुरए तोबा 9, छंद 102; सुरए नूर 24, छंद 5

[4] सुरए आराफ़ 7, छंद 96