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Saturday 25th of March 2017
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जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. विलायत के आसमान का एक तारा।

क़ुरआने मजीद सूरए नहल की आयत 16 में फ़रमाता है:
 ’’وَ بِالنَّجمِ ھُم یَھتَدونَ‘‘
बुद्धिमान वह हैं जो आसमान के तारों की सहायता से अपने रास्ते ढ़ूढ़ँते हैं और मंज़िल तक पहुँच जाते हैं। यह तारा जो आसमान में चमकता है, यह क्या होता है? क्या यह इतना ही छोटा सा एक दिया होता है जो टिमटमाता रहता है? जी नहीं! तारे की ख़ुद अपनी एक दुनिया है। कभी कभी यह पूरी एक गिलैक्सी होती है, कभी कभी एक तारा एक गिलैक्सी से बड़ा होता है लेकिन हमें छोटा सा दिखाई देता है। हम तारे की हल्की सी चमक देखते हैं लेकिन वह उससे कई करोड़ गुना बड़ा होता है जितना हमें नज़र आता है। जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. भी विलायत के आसमान का एक तारा हैं।
हमें उनकी महानता और श्रेष्ठता के बारे में बहुत कम मालूम है वरना सच यह है कि हम उनकी श्रेष्ठता के बारे में सोच भी नहीं सकते। एक हदीस में मिलता है कि जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. इतनी ज़्यादा नूरानी हैं कि आपकी चमक से आसमान के फ़रिश्तों की आँखें चौंधिया जाती हैं।
 ’’زہرا نورھا للملائکۃ السماء‘‘(امالی شیخ صدوق،مجلس ۲۴،ص۹۹)۔
यह तारा आसमान वालों के लिये चमकता है। यह तारा हमारे लिये हिदायत का तारा है। हमनें हिदायत के इस तारे से क्या पाया है? हमारे लिये ज़रूरी है कि इस चमकते तारे की रौशनी में ख़ुदा और ख़ुदा के रास्ते की खोज करें। वह रास्ता जिसे सीधा रास्ता कहते हैं, जिस रास्ते पर ख़ुद बीबी ज़हरा स. चली हैं। आपका जन्म भी एक ख़ास चीज़ से हुआ है। ख़ुदा यह बात जानता था कि यह महान औरत दुनिया में हर एम्तेहान और परीक्षा में सफल होगी इसलिये इसके जन्म का इंतेज़ाम भी ख़ास तरीक़े से किया।
इमामे जाफ़र सादिक़ अ. आपकी एक ज़ियारत में फ़रमाते हैं:
 :’’امتحنک اللہ الذی خلقک قبل ان یخلقک فوجدک لما امتخنک صابرہ ‘‘
ख़ुदा नें आपको पैदा करने से पहले आपका इम्तेहान लिया जिसमें आप सफल हुईं और अल्लाह की कसौटी पर खरी उतरीं। इसी लिये ख़ुदा नें उन्हें हमारे लिये हिदायत का एक आईडियल बनाया। इसलिये कि उनकी ज़िन्दगी का एक एक मिनट और एक एक क़दम अल्लाह के लिये था।
हमारी किताबों में यह हदीस है कि एक दिन रसूले ख़ुदा स. नें जनाबे फ़ातिमा स. से फ़रमाया:
 ’’یا فاطمہ اننی لم اغنی عنک من اللہ شیأ ‘‘
ऐ मेरी प्यारी बेटी फ़ातिमा! ख़ुदा के यहाँ मैं तुम्हे किसी चीज़ से रोक नहीं सकता और नाहि बचा सकता हूँ। इसी लिये बीबी बचपन से ज़िंदगी के आख़िरी समय तक अपनी चिंता में थीं और उन्होंने ख़ुद अपनी ज़िन्दगी बनाई है।
इमामे जाफ़र सादिक़ अ. फ़रमाते हैं:
 ’’انّ فاطمۃ کانت محدّثہ ( بحار الانوار ، ج،۱۴ ، ص ، ۲۰۶ )
फ़ातिमा ज़हरा मोहद्देसा थीं। यानी फ़रिश्ते उनके पास आते थे, आपके साथ बातें करते थे। किसी भी शिया या सुन्नी नें इस बात को ग़लत नहीं बताया है क्योंकि दोनों के उल्मा इस बात को मानते हैं कि बहुत से लोग ऐसे रहे हैं जिनके साथ फ़रिश्ते बात किया करते थे।
जिस तरह फ़रिश्ते जनाबे मरियम के पास आते थे और उनसे कहते थे:
’’ یا فاطمۃ: انّ اللہ اصطفٰیک و طھّر کو اصفیک علی نساء العالمین ‘‘( آل عمران ۴۲ )
आपको ख़ुदा नें चुन लिया है और अपना ख़ास बनाया है और आपको पूरी दुनिया की औरतों का सरदार बनाया है। इसी तरह फ़रिश्ते जनाबे फ़ातिमा स. के पास आते थे और उनसे कहते थे, “आपको ख़ुदा नें चुन लिया है और अपना ख़ास बनाया है और आपको पूरी दुनिया की औरतों का सरदार बनाया है”। इमाम जाफ़र सादिक़ अ. फ़रमाते हैं, “एक दिन बीबी नें फ़रिश्तों से कहा:
 آ’’الیست المفضّلۃ علی نساءالعالمین مریم؟‘‘
क्या वह जनाबे मरियम नहीं हैं जिन्हें ख़ुदा नें सारी औरतों का सरदार बनाया है? क्या वह मरियम नहीं हैं जिनके बारे में ख़ुदा नें फ़रमाया है: हम नें आपको सारी दुनिया की औरतों का सरदार बनाया है। जवाब में फ़रिश्तों नें उनसे कहा: मरियम अपने ज़माने की औरतों की सरदार थीं लेकिन आप शुरू से आख़ेरत तक, क़यामत तक सारी औरतों से महान हैं और उनकी सरदार हैं। हदीस में या है: एक दिन जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. नें हज़रत अली अ. से कहा: फ़रिश्ते मेरे पास आते हैं, मुझे बहुत सी बातें बताते हैं।
इमाम अली अ. नें उनसे कहा: अब जब भी आपको फ़रिश्ते की आवाज़ आए तो आप मुझे बता दिया करें ताकि मैं उसे लिख लूँ। इस तरह जब भी फ़रिश्ता आपके पास आता और आपको अल्लाह का संदेश देता तो आप उसे इमाम अली अ. से बता दिया करती थीं, इमाम अ. उसे लिख लिया करते थे, बाद में यह सारी बातें एक किताब की शक्ल में सामने आईं जिसे, “सहीफ़ए फ़ातिमा” कहा जाता है। यह किताब इमामों के पास हा करती थी जिसे वह पढ़ा करते थे। इस किताब के बारे में इमाम जाफ़र सादिक़ अ. फ़रमाते हैं:
 ’’انّہ لیس فیھا حلال و حرام‘‘
इस किताब में हलाल और हराम की बातें नहीं हैं।
 ’’ فیھا علم ما یکون ‘‘
इसमें बाद में होने वाली घटनों के बारे में है। यह आसमानी बातें हैं। आप ज़रा सोचें कि इतनी छोटी सी उम्र में ख़ुदा एक औरत के पास अपने फ़रिश्ते भेजता है जो उस से बातें करते हैं और ख़ुदा का संदेश और ग़ैब की बातें उस तक पहुँचाते हैं। यह कोई मामूली बात नहीं है।

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