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استاد حسین انصاریان

लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी

लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी

लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी

ज़िंदगी शम्अ की सूरत हो ख़ुदाया मेरी!


दूर दुनिया का मेरे दम से अँधेरा हो जाए!

हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाए!


हो मेरे दम से यूँही मेरे वतन की ज़ीनत

जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत


ज़िंदगी हो मिरी परवाने की सूरत या-रब

इल्म की शम्अ से हो मुझ को मोहब्बत या-रब


हो मिरा काम ग़रीबों की हिमायत करना

दर्द-मंदों से ज़ईफ़ों से मोहब्बत करना


मेरे अल्लाह! बुराई से बचाना मुझ को

नेक जो राह हो उस रह पे चलाना मुझ को