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पवित्र कुरआन - सूरह الملك - جزء بيست و نهم - सूरह ملک - सूरह قلم - पृष्ठ 564

पाठ सेटिंग्स
फ़ॉन्ट प्रकार
फ़ॉन्ट आकार
फ़ॉन्ट रंग
फ़ॉन्ट प्रकार
फ़ॉन्ट आकार
फ़ॉन्ट रंग
الملك 
सूरह قلم 
الحاقة 
فَلَمَّا رَأَوْهُ زُلْفَةً سِيئَتْ وُجُوهُ الَّذِينَ كَفَرُوا وَقِيلَ هَٰذَا الَّذِي كُنْتُمْ بِهِ تَدَّعُونَ ٢٧ قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِنْ أَهْلَكَنِيَ اللَّهُ وَمَنْ مَعِيَ أَوْ رَحِمَنَا فَمَنْ يُجِيرُ الْكَافِرِينَ مِنْ عَذَابٍ أَلِيمٍ ٢٨ قُلْ هُوَ الرَّحْمَٰنُ آمَنَّا بِهِ وَعَلَيْهِ تَوَكَّلْنَا ۖ فَسَتَعْلَمُونَ مَنْ هُوَ فِي ضَلَالٍ مُبِينٍ ٢٩ قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِنْ أَصْبَحَ مَاؤُكُمْ غَوْرًا فَمَنْ يَأْتِيكُمْ بِمَاءٍ مَعِينٍ ٣٠
بسم‌الله
ن ۚ وَالْقَلَمِ وَمَا يَسْطُرُونَ ١ مَا أَنْتَ بِنِعْمَةِ رَبِّكَ بِمَجْنُونٍ ٢ وَإِنَّ لَكَ لَأَجْرًا غَيْرَ مَمْنُونٍ ٣ وَإِنَّكَ لَعَلَىٰ خُلُقٍ عَظِيمٍ ٤ فَسَتُبْصِرُ وَيُبْصِرُونَ ٥ بِأَيْيِكُمُ الْمَفْتُونُ ٦ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَنْ ضَلَّ عَنْ سَبِيلِهِ وَهُوَ أَعْلَمُ بِالْمُهْتَدِينَ ٧ فَلَا تُطِعِ الْمُكَذِّبِينَ ٨ وَدُّوا لَوْ تُدْهِنُ فَيُدْهِنُونَ ٩ وَلَا تُطِعْ كُلَّ حَلَّافٍ مَهِينٍ ١٠ هَمَّازٍ مَشَّاءٍ بِنَمِيمٍ ١١ مَنَّاعٍ لِلْخَيْرِ مُعْتَدٍ أَثِيمٍ ١٢ عُتُلٍّ بَعْدَ ذَٰلِكَ زَنِيمٍ ١٣ أَنْ كَانَ ذَا مَالٍ وَبَنِينَ ١٤ إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ آيَاتُنَا قَالَ أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ ١٥
फिर जब वे उसे निकट देखेंगे तो उन लोगों के चेहरे बिगड़ जाएँगे जिन्होंने इनकार की नीति अपनाई; और कहा जाएगा, "यही है वह चीज़ जिसकी तुम माँग कर रहे थे।" (27) कहो, "क्या तुमने यह भी सोचा कि यदि अल्लाह मुझे और उन्हें भी, जो मेरे साथ है, विनष्ट ही कर दे या वह हम पर दया करे, आख़िर इनकार करनेवालों को दुखद यातना से कौन पनाह देगा?" (28) कह दो, "वह रहमान है। उसी पर हम ईमान लाए है और उसी पर हमने भरोसा किया। तो शीघ्र ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि खुली गुमराही में कौन पड़ा हुआ है।" (29) कहो, "क्या तुमने यह भी सोचा कि यदि तुम्हारा पानी (धरती में) नीचे उतर जाए तो फिर कौन तुम्हें लाकर देगा निर्मल प्रवाहित जल?" (30) नून॰। गवाह है क़लम और वह चीज़ जो वे लिखते है, (1) तुम अपने रब की अनुकम्पा से कोई दीवाने नहीं हो (2) निश्चय ही तुम्हारे लिए ऐसा प्रतिदान है जिसका क्रम कभी टूटनेवाला नहीं (3) निस्संदेह तुम एक महान नैतिकता के शिखर पर हो (4) अतः शीघ्र ही तुम भी देख लोगे और वे भी देख लेंगे (5) कि तुममें से कौन विभ्रमित है (6) निस्संदेह तुम्हारा रब उसे भली-भाँति जानता है जो उसके मार्ग से भटक गया है, और वही उन लोगों को भी जानता है जो सीधे मार्ग पर हैं (7) अतः तुम झुठलानेवालों को कहना न मानना (8) वे चाहते है कि तुम ढीले पड़ो, इस कारण वे चिकनी-चुपड़ी बातें करते है (9) तुम किसी भी ऐसे व्यक्ति की बात न मानना जो बहुत क़समें खानेवाला, हीन है, (10) कचोके लगाता, चुग़लियाँ खाता फिरता हैं, (11) भलाई से रोकता है, सीमा का उल्लंघन करनेवाला, हक़ मारनेवाला है, (12) क्रूर है फिर अधम भी। (13) इस कारण कि वह धन और बेटोंवाला है (14) जब उसे हमारी आयतें सुनाई जाती है तो कहता है, "ये तो पहले लोगों की कहानियाँ हैं!" (15)