हमारे समाज में बहुत सी ईदें आती हैं जैसे ईद उल फि़त्र, ईदे क़ुरबान, ईदे मुबाहिला और ईदे ज़हरा वग़ैरह, यह सारी ईदें किसी वाकेए की तरफ़ इशारा करती हैं।...
इन्तेज़ार के विभिन्न अर्थ व मअनी वर्णन किये गए हैं, लेकिन इस शब्द पर गौर व फिक्र के ज़रिये इसके अर्थ की वास्तविक्ता तक पहुँचा जा सकता है। इन्तेज़ार का...
मासूम इमामों की हदीसों और रिवायतों में ज़हूर का इन्तेज़ार करने वालों की बहुत सी ज़िम्मेदारियों का वर्णन हुआ हैं। हम यहाँ पर उन में से कुछ महत्वपूर्ण न...
मुनासिब मालूम होता है कि उन सुफ़रा के अस्मा भी दर्ज कर दिये जायें जो नव्वाबे ख़ास के ज़रिये और सिफ़ारिश से इमाम के हुक्म से मुमालिके महरूसा मख़सूसा मे...
हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के वुजूद, ग़ैबत, तूले उम्र और आपके ज़हूर के बाद तमाम अदयान के एक हो जाने से मुताअल्लिक़ 94 आयतें क़ुरआने मजीद में मौजूद है...
आपकी ग़ैबत की दो हैसियतें थीं। एक सुग़रा और दूसरी कुबरा। ग़ैबते सुग़रा की मुद्दत 69 साल थी। उसके बाद ग़ैबते कुबरा शुरू हो गई। ग़ैबते सुग़रा केज़माने म...