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पवित्र कुरआन - सूरह الصافات - جزء بيست و سوم - सूरह صافات - पृष्ठ 446

पाठ सेटिंग्स
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يس 
सूरह صافات 
ص 
بسم‌الله
وَالصَّافَّاتِ صَفًّا ١ فَالزَّاجِرَاتِ زَجْرًا ٢ فَالتَّالِيَاتِ ذِكْرًا ٣ إِنَّ إِلَٰهَكُمْ لَوَاحِدٌ ٤ رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَرَبُّ الْمَشَارِقِ ٥ إِنَّا زَيَّنَّا السَّمَاءَ الدُّنْيَا بِزِينَةٍ الْكَوَاكِبِ ٦ وَحِفْظًا مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ مَارِدٍ ٧ لَا يَسَّمَّعُونَ إِلَى الْمَلَإِ الْأَعْلَىٰ وَيُقْذَفُونَ مِنْ كُلِّ جَانِبٍ ٨ دُحُورًا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ وَاصِبٌ ٩ إِلَّا مَنْ خَطِفَ الْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُ شِهَابٌ ثَاقِبٌ ١٠ فَاسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمْ مَنْ خَلَقْنَا ۚ إِنَّا خَلَقْنَاهُمْ مِنْ طِينٍ لَازِبٍ ١١ بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ ١٢ وَإِذَا ذُكِّرُوا لَا يَذْكُرُونَ ١٣ وَإِذَا رَأَوْا آيَةً يَسْتَسْخِرُونَ ١٤ وَقَالُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُبِينٌ ١٥ أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ ١٦ أَوَآبَاؤُنَا الْأَوَّلُونَ ١٧ قُلْ نَعَمْ وَأَنْتُمْ دَاخِرُونَ ١٨ فَإِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٌ وَاحِدَةٌ فَإِذَا هُمْ يَنْظُرُونَ ١٩ وَقَالُوا يَا وَيْلَنَا هَٰذَا يَوْمُ الدِّينِ ٢٠ هَٰذَا يَوْمُ الْفَصْلِ الَّذِي كُنْتُمْ بِهِ تُكَذِّبُونَ ٢١ احْشُرُوا الَّذِينَ ظَلَمُوا وَأَزْوَاجَهُمْ وَمَا كَانُوا يَعْبُدُونَ ٢٢ مِنْ دُونِ اللَّهِ فَاهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَاطِ الْجَحِيمِ ٢٣ وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُمْ مَسْئُولُونَ ٢٤
गवाह है परा जमाकर पंक्तिबद्ध होनेवाले; (1) फिर डाँटनेवाले; (2) फिर यह ज़िक्र करनेवाले (3) कि तुम्हारा पूज्य-प्रभु अकेला है। (4) वह आकाशों और धरती और जो कुछ उनके बीच है सबका रब है और पूर्व दिशाओं का भी रब है (5) हमने दुनिया के आकाश को सजावट अर्थात तारों से सुसज्जित किया, (रात में मुसाफ़िरों को मार्ग दिखाने के लिए) (6) और प्रत्येक सरकश शैतान से सुरक्षित रखने के लिए (7) वे (शैतान) "मलए आला" की ओर कान नहीं लगा पाते और हर ओर से फेंक मारे जाते है भगाने-धुतकारने के लिए। (8) और उनके लिए अनवरत यातना है (9) किन्तु यह और बात है कि कोई कुछ उचक ले, इस दशा में एक तेज़ दहकती उल्का उसका पीछा करती है (10) अब उनके पूछो कि उनके पैदा करने का काम अधिक कठिन है या उन चीज़ों का, जो हमने पैदा कर रखी है। निस्संदेह हमने उनको लेसकर मिट्टी से पैदा किया। (11) बल्कि तुम तो आश्चर्य में हो और वे है कि परिहास कर रहे है (12) और जब उन्हें याद दिलाया जाता है, तो वे याद नहीं करते, (13) और जब कोई निशानी देखते है तो हँसी उड़ाते है (14) और कहते है, "यह तो बस एक प्रत्यक्ष जादू है (15) क्या जब हम मर चुके होंगे और मिट्टी और हड्डियाँ होकर रह जाएँगे, तो क्या फिर हम उठाए जाएँगे? (16) क्या और हमारे पहले के बाप-दादा भी?" (17) कह दो, "हाँ! और तुम अपमानित भी होंगे।" (18) वह तो बस एक झिड़की होगी। फिर क्या देखेंगे कि वे ताकने लगे है (19) और वे कहेंगे, "ऐ अफ़सोस हमपर! यह तो बदले का दिन है।" (20) यह वही फ़ैसले का दिन है जिसे तुम झुठलाते रहे हो (21) (कहा जाएगा) "एकत्र करो उन लोगों को जिन्होंने ज़ुल्म किया और उनके जोड़ीदारों को भी और उनको भी जिनकी अल्लाह से हटकर वे बन्दगी करते रहे है। (22) फिर उन सबको भड़कती हुई आग की राह दिखाओ!" (23) और तनिक उन्हें ठहराओ, उनसे पूछना है, (24)