निस्सदेह डर रखनेवालों के लिए एक बड़ी सफलता है,
(31)
बाग़ है और अंगूर,
(32)
और नवयौवना समान उम्रवाली,
(33)
और छलक़ता जाम
(34)
वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न कोई झुठलाने की बात
(35)
यह तुम्हारे रब की ओर से बदला होगा, हिसाब के अनुसार प्रदत्त
(36)
वह आकाशों और धरती का और जो कुछ उनके बीच है सबका रब है, अत्यन्त कृपाशील है, उसके सामने बात करना उनके बस में नहीं होगा
(37)
जिस दिन रूह और फ़रिश्ते पक्तिबद्ध खड़े होंगे, वे बोलेंगे नहीं, सिवाय उस व्यक्ति के जिसे रहमान अनुमति दे और जो ठीक बात कहे
(38)
वह दिन सत्य है। अब जो कोई चाहे अपने रब की ओर रुज करे
(39)
हमने तुम्हें निकट आ लगी यातना से सावधान कर दिया है। जिस दिन मनुष्य देख लेगा जो कुछ उसके हाथों ने आगे भेजा, और इनकार करनेवाला कहेगा, "ऐ काश! कि मैं मिट्टी होता!"
(40)
गवाह है वे (हवाएँ) जो ज़ोर से उखाड़ फैंके,
(1)
और गवाह है वे (हवाएँ) जो नर्मी के साथ चलें,
(2)
और गवाह है वे जो वायुमंडल में तैरें,
(3)
फिर एक-दूसरे से अग्रसर हों,
(4)
और मामले की तदबीर करें
(5)
जिस दिन हिला डालेगी हिला डालनेवाले घटना,
(6)
उसके पीछ घटित होगी दूसरी (घटना)
(7)
कितने ही दिल उस दिन काँप रहे होंगे,
(8)
उनकी निगाहें झुकी होंगी
(9)
वे कहते है, "क्या वास्तव में हम पहली हालत में फिर लौटाए जाएँगे?
(10)
क्या जब हम खोखली गलित हड्डियाँ हो चुके होंगे?"
(11)
वे कहते है, "तब तो लौटना बड़े ही घाटे का होगा।"
(12)
वह तो बस एक ही झिड़की होगी,
(13)
फिर क्या देखेंगे कि वे एक समतल मैदान में उपस्थित है
(14)
क्या तुम्हें मूसा की ख़बर पहुँची है?
(15)