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पवित्र कुरआन - सूरह الليل - جزء سي ام - सूरह ليل - सूरह ضحي - सूरह شرح - पृष्ठ 596

पाठ सेटिंग्स
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الليل 
सूरह ضحي  सूरह شرح 
التين 
لَا يَصْلَاهَا إِلَّا الْأَشْقَى ١٥ الَّذِي كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ ١٦ وَسَيُجَنَّبُهَا الْأَتْقَى ١٧ الَّذِي يُؤْتِي مَالَهُ يَتَزَكَّىٰ ١٨ وَمَا لِأَحَدٍ عِنْدَهُ مِنْ نِعْمَةٍ تُجْزَىٰ ١٩ إِلَّا ابْتِغَاءَ وَجْهِ رَبِّهِ الْأَعْلَىٰ ٢٠ وَلَسَوْفَ يَرْضَىٰ ٢١
بسم‌الله
وَالضُّحَىٰ ١ وَاللَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ ٢ مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ ٣ وَلَلْآخِرَةُ خَيْرٌ لَكَ مِنَ الْأُولَىٰ ٤ وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰ ٥ أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًا فَآوَىٰ ٦ وَوَجَدَكَ ضَالًّا فَهَدَىٰ ٧ وَوَجَدَكَ عَائِلًا فَأَغْنَىٰ ٨ فَأَمَّا الْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ ٩ وَأَمَّا السَّائِلَ فَلَا تَنْهَرْ ١٠ وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ ١١
بسم‌الله
أَلَمْ نَشْرَحْ لَكَ صَدْرَكَ ١ وَوَضَعْنَا عَنْكَ وِزْرَكَ ٢ الَّذِي أَنْقَضَ ظَهْرَكَ ٣ وَرَفَعْنَا لَكَ ذِكْرَكَ ٤ فَإِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا ٥ إِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا ٦ فَإِذَا فَرَغْتَ فَانْصَبْ ٧ وَإِلَىٰ رَبِّكَ فَارْغَبْ ٨
इसमें बस वही पड़ेगा जो बड़ा ही अभागा होगा, (15) जिसने झुठलाया और मुँह फेरा (16) और उससे बच जाएगा वह अत्यन्त परहेज़गार व्यक्ति, (17) जो अपना माल देकर अपने आपको निखारता है (18) और हाल यह है कि किसी का उसपर उपकार नहीं कि उसका बदला दिया जा रहा हो, (19) बल्कि इससे अभीष्ट केवल उसके अपने उच्च रब के मुख (प्रसन्नता) की चाह है (20) और वह शीघ्र ही राज़ी हो जाएगा (21) साक्षी है चढ़ता दिन, (1) और रात जबकि उसका सन्नाटा छा जाए (2) तुम्हारे रब ने तुम्हें न तो विदा किया और न वह बेज़ार (अप्रसन्न) हुआ (3) और निश्चय ही बाद में आनेवाली (अवधि) तुम्हारे लिए पहलेवाली से उत्तम है (4) और शीघ्र ही तुम्हारा रब तुम्हें प्रदान करेगा कि तुम प्रसन्न हो जाओगे (5) क्या ऐसा नहीं कि उसने तुम्हें अनाथ पाया तो ठिकाना दिया? (6) और तुम्हें मार्ग से अपरिचित पाया तो मार्ग दिखाया? (7) और तुम्हें निर्धन पाया तो समृद्ध कर दिया? (8) अतः जो अनाथ हो उसे मत दबाना, (9) और जो माँगता हो उसे न झिझकना, (10) और जो तुम्हें रब की अनुकम्पा है, उसे बयान करते रहो (11) क्या ऐसा नहीं कि हमने तुम्हारा सीना तुम्हारे लिए खोल दिया? (1) और तुमपर से तुम्हारा बोझ उतार दिया, (2) जो तुम्हारी कमर तोड़े डाल रहा था? (3) और तुम्हारे लिए तुम्हारे ज़िक्र को ऊँचा कर दिया? (4) अतः निस्संदेह कठिनाई के साथ आसानी भी है (5) निस्संदेह कठिनाई के साथ आसानी भी है (6) अतः जब निवृत हो तो परिश्रम में लग जाओ, (7) और अपने रब से लौ लगाओ (8)