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पवित्र कुरआन - सूरह المزمل - جزء بيست و نهم - सूरह مزمل - पृष्ठ 574

पाठ सेटिंग्स
फ़ॉन्ट प्रकार
फ़ॉन्ट आकार
फ़ॉन्ट रंग
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الجن 
सूरह مزمل 
المدثر 
بسم‌الله
يَا أَيُّهَا الْمُزَّمِّلُ ١ قُمِ اللَّيْلَ إِلَّا قَلِيلًا ٢ نِصْفَهُ أَوِ انْقُصْ مِنْهُ قَلِيلًا ٣ أَوْ زِدْ عَلَيْهِ وَرَتِّلِ الْقُرْآنَ تَرْتِيلًا ٤ إِنَّا سَنُلْقِي عَلَيْكَ قَوْلًا ثَقِيلًا ٥ إِنَّ نَاشِئَةَ اللَّيْلِ هِيَ أَشَدُّ وَطْئًا وَأَقْوَمُ قِيلًا ٦ إِنَّ لَكَ فِي النَّهَارِ سَبْحًا طَوِيلًا ٧ وَاذْكُرِ اسْمَ رَبِّكَ وَتَبَتَّلْ إِلَيْهِ تَبْتِيلًا ٨ رَبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ فَاتَّخِذْهُ وَكِيلًا ٩ وَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَاهْجُرْهُمْ هَجْرًا جَمِيلًا ١٠ وَذَرْنِي وَالْمُكَذِّبِينَ أُولِي النَّعْمَةِ وَمَهِّلْهُمْ قَلِيلًا ١١ إِنَّ لَدَيْنَا أَنْكَالًا وَجَحِيمًا ١٢ وَطَعَامًا ذَا غُصَّةٍ وَعَذَابًا أَلِيمًا ١٣ يَوْمَ تَرْجُفُ الْأَرْضُ وَالْجِبَالُ وَكَانَتِ الْجِبَالُ كَثِيبًا مَهِيلًا ١٤ إِنَّا أَرْسَلْنَا إِلَيْكُمْ رَسُولًا شَاهِدًا عَلَيْكُمْ كَمَا أَرْسَلْنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ رَسُولًا ١٥ فَعَصَىٰ فِرْعَوْنُ الرَّسُولَ فَأَخَذْنَاهُ أَخْذًا وَبِيلًا ١٦ فَكَيْفَ تَتَّقُونَ إِنْ كَفَرْتُمْ يَوْمًا يَجْعَلُ الْوِلْدَانَ شِيبًا ١٧ السَّمَاءُ مُنْفَطِرٌ بِهِ ۚ كَانَ وَعْدُهُ مَفْعُولًا ١٨ إِنَّ هَٰذِهِ تَذْكِرَةٌ ۖ فَمَنْ شَاءَ اتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِ سَبِيلًا ١٩
ऐ कपड़े में लिपटनेवाले! (1) रात को उठकर (नमाज़ में) खड़े रहा करो - सिवाय थोड़ा हिस्सा - (2) आधी रात (3) या उससे कुछ थोड़ा कम कर लो या उससे कुछ अधिक बढ़ा लो और क़ुरआन को भली-भाँति ठहर-ठहरकर पढ़ो। - (4) निश्चय ही हम तुमपर एक भारी बात डालनेवाले है (5) निस्संदेह रात का उठना अत्यन्त अनुकूलता रखता है और बात भी उसमें अत्यन्त सधी हुई होती है (6) निश्चय ही तुम्हार लिए दिन में भी (तसबीह की) बड़ी गुंजाइश है। - (7) और अपने रब के नाम का ज़िक्र किया करो और सबसे कटकर उसी के हो रहो। (8) वह पूर्व और पश्चिम का रब है, उसके सिवा कोई इष्ट-पूज्य नहीं, अतः तुम उसी को अपना कार्यसाधक बना लो (9) और जो कुछ वे कहते है उसपर धैर्य से काम लो और भली रीति से उनसे अलग हो जाओ (10) और तुम मुझे और झूठलानेवाले सुख-सम्पन्न लोगों को छोड़ दो और उन्हें थोड़ी मुहलत दो (11) निश्चय ही हमारे पास बेड़ियाँ है और भड़कती हुई आग (12) और गले में अटकनेवाला भोजन है और दुखद यातना, (13) जिस दिन धरती और पहाड़ काँप उठेंगे, और पहाड़ रेत के ऐसे ढेर होकर रह जाएगे जो बिखरे जा रहे होंगे (14) निश्चय ही हुमने तुम्हारी ओर एक रसूल तुमपर गवाह बनाकर भेजा है, जिस प्रकार हमने फ़़िरऔन की ओर एक रसूल भेजा था (15) किन्तु फ़िरऔन ने रसूल की अवज्ञा कि, तो हमने उसे पकड़ लिया और यह पकड़ सख़्त वबाल थी (16) यदि तुमने इनकार किया तो उस दिन से कैसे बचोगे जो बच्चों को बूढा कर देगा? (17) आकाश उसके कारण फटा पड़ रहा है, उसका वादा तो पूरा ही होना है (18) निश्चय ही यह एक अनुस्मृति है। अब जो चाहे अपने रब की ओर मार्ग ग्रहण कर ले (19)