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पवित्र कुरआन - सूरह المطففين - جزء سي ام - सूरह مطففين - सूरह انشقاق - पृष्ठ 589

पाठ सेटिंग्स
फ़ॉन्ट प्रकार
फ़ॉन्ट आकार
फ़ॉन्ट रंग
फ़ॉन्ट प्रकार
फ़ॉन्ट आकार
फ़ॉन्ट रंग
المطففين 
सूरह انشقاق 
البروج 
عَلَى الْأَرَائِكِ يَنْظُرُونَ ٣٥ هَلْ ثُوِّبَ الْكُفَّارُ مَا كَانُوا يَفْعَلُونَ ٣٦
بسم‌الله
إِذَا السَّمَاءُ انْشَقَّتْ ١ وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ ٢ وَإِذَا الْأَرْضُ مُدَّتْ ٣ وَأَلْقَتْ مَا فِيهَا وَتَخَلَّتْ ٤ وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ ٥ يَا أَيُّهَا الْإِنْسَانُ إِنَّكَ كَادِحٌ إِلَىٰ رَبِّكَ كَدْحًا فَمُلَاقِيهِ ٦ فَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِيَمِينِهِ ٧ فَسَوْفَ يُحَاسَبُ حِسَابًا يَسِيرًا ٨ وَيَنْقَلِبُ إِلَىٰ أَهْلِهِ مَسْرُورًا ٩ وَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ وَرَاءَ ظَهْرِهِ ١٠ فَسَوْفَ يَدْعُو ثُبُورًا ١١ وَيَصْلَىٰ سَعِيرًا ١٢ إِنَّهُ كَانَ فِي أَهْلِهِ مَسْرُورًا ١٣ إِنَّهُ ظَنَّ أَنْ لَنْ يَحُورَ ١٤ بَلَىٰ إِنَّ رَبَّهُ كَانَ بِهِ بَصِيرًا ١٥ فَلَا أُقْسِمُ بِالشَّفَقِ ١٦ وَاللَّيْلِ وَمَا وَسَقَ ١٧ وَالْقَمَرِ إِذَا اتَّسَقَ ١٨ لَتَرْكَبُنَّ طَبَقًا عَنْ طَبَقٍ ١٩ فَمَا لَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ ٢٠ وَإِذَا قُرِئَ عَلَيْهِمُ الْقُرْآنُ لَا يَسْجُدُونَ ۩ अनुशंसित सजदा ٢١ بَلِ الَّذِينَ كَفَرُوا يُكَذِّبُونَ ٢٢ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُوعُونَ ٢٣ فَبَشِّرْهُمْ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ ٢٤ إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ ٢٥
ऊँची मसनदों पर से देख रहे है (35) क्या मिल गया बदला इनकार करनेवालों को उसका जो कुछ वे करते रहे है? (36) जबकि आकाश फट जाएगा, (1) और वह अपने रब की सुनेगा, और उसे यही चाहिए भी (2) जब धरती फैला दी जाएगी (3) और जो कुछ उसके भीतर है उसे बाहर डालकर खाली हो जाएगी (4) और वह अपने रब की सुनेगी, और उसे यही चाहिए भी (5) ऐ मनुष्य! तू मशक़्क़त करता हुआ अपने रब ही की ओर खिंचा चला जा रहा है और अन्ततः उससे मिलने वाला है (6) फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया, (7) तो उससे आसान, सरसरी हिसाब लिया जाएगा (8) और वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश पलटेगा (9) और रह वह व्यक्ति जिसका कर्म-पत्र (उसके बाएँ हाथ में) उसकी पीठ के पीछे से दिया गया, (10) तो वह विनाश (मृत्यु) को पुकारेगा, (11) और दहकती आग में जा पड़ेगा (12) वह अपने लोगों में मग्न था, (13) उसने यह समझ रखा था कि उसे कभी पलटना नहीं है (14) क्यों नहीं, निश्चय ही उसका रब तो उसे देख रहा था! (15) अतः कुछ नहीं, मैं क़सम खाता हूँ सांध्य-लालिमा की, (16) और रात की और उसके समेट लेने की, (17) और चन्द्रमा की जबकि वह पूर्ण हो जाता है, (18) निश्चय ही तुम्हें मंजिल पर मंजिल चढ़ना है (19) फिर उन्हें क्या हो गया है कि ईमान नहीं लाते? (20) और जब उन्हें कुरआन पढ़कर सुनाया जाता है तो सजदे में नहीं गिर पड़ते? (21) नहीं, बल्कि इनकार करनेवाले तो झुठलाते है, (22) हालाँकि जो कुछ वे अपने अन्दर एकत्र कर रहे है, अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है (23) अतः उन्हें दुखद यातना की मंगल सूचना दे दो (24) अलबत्ता जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए कभी न समाप्त॥ होनेवाला प्रतिदान है (25)