कितना है क़ुरैश को लगाए और परचाए रखना,
(1)
लगाए और परचाए रखना उन्हें जाड़े और गर्मी की यात्रा से
(2)
अतः उन्हें चाहिए कि इस घर (काबा) के रब की बन्दगी करे,
(3)
जिसने उन्हें खिलाकर भूख से बचाया और निश्चिन्तता प्रदान करके भय से बचाया
(4)
क्या तुमने उसे देखा जो दीन को झुठलाता है?
(1)
वही तो है जो अनाथ को धक्के देता है,
(2)
और मुहताज के खिलाने पर नहीं उकसाता
(3)
अतः तबाही है उन नमाज़ियों के लिए,
(4)
जो अपनी नमाज़ से ग़ाफिल (असावधान) हैं,
(5)
जो दिखावे के लिए कार्य करते हैं,
(6)
और साधारण बरतने की चीज़ भी किसी को नहीं देते
(7)
निश्चय ही हमने तुम्हें कौसर प्रदान किया,
(1)
अतः तुम अपने रब ही के लिए नमाज़ पढ़ो और (उसी के दिन) क़़ुरबानी करो
(2)
निस्संदेह तुम्हारा जो वैरी है वही जड़कटा है
(3)