गवाह है गुज़रता समय,
(1)
कि वास्तव में मनुष्य घाटे में है,
(2)
सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और अच्छे कर्म किए और एक-दूसरे को हक़ की ताकीद की, और एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की
(3)
तबाही है हर कचो के लगानेवाले, ऐब निकालनेवाले के लिए,
(1)
जो माल इकट्ठा करता और उसे गिनता रहा
(2)
समझता है कि उसके माल ने उसे अमर कर दिया
(3)
कदापि नहीं, वह चूर-चूर कर देनेवाली में फेंक दिया जाएगा,
(4)
और तुम्हें क्या मालूम कि वह चूर-चूर कर देनेवाली क्या है?
(5)
वह अल्लाह की दहकाई हुई आग है,
(6)
जो झाँक लेती है दिलों को
(7)
वह उनपर ढाँककर बन्द कर दी गई होगी,
(8)
लम्बे-लम्बे स्तम्भों में
(9)
क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे रब ने हाथीवालों के साथ कैसा बरताव किया?
(1)
क्या उसने उनकी चाल को अकारथ नहीं कर दिया?
(2)
और उनपर नियुक्त होने को झुंड के झुंड पक्षी भेजे,
(3)
उनपर कंकरीले पत्थर मार रहे थे
(4)
अन्ततः उन्हें ऐसा कर दिया, जैसे खाने का भूसा हो
(5)