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शार्गिदे इमाम अली रूशैद हजरी

इराक मे दफ्न बुज़ुर्ग शख्सीयात मे से एक जनाबे रूशैद हजरी है कि जो इमाम अली अलैहिस्सलाम के असहाबे खास मे से थे और ईमान और अमल के बड़े दरजे पर फाएज थे शायद इसी लिऐ परवरदिगारे आलम ने इराक मे मौजूद असहाबे इमाम मे आपको एक अज़ीम हैसीयत अता की है।
शार्गिदे इमाम अली रूशैद हजरी



इराक मे दफ्न बुज़ुर्ग शख्सीयात मे से एक जनाबे रूशैद हजरी है कि जो इमाम अली अलैहिस्सलाम के असहाबे खास मे से थे और ईमान और अमल के बड़े दरजे पर फाएज थे शायद इसी लिऐ परवरदिगारे आलम ने इराक मे मौजूद असहाबे इमाम मे आपको एक अज़ीम हैसीयत अता की है।

 

वतन
जनाबे रूशैद के वतन के बारे मे कहा जाता है कि आप बैहरैन, यमन या मदीने के पास के किसी गाँव के रहने वाले थे ऐतिहासिक किताबो मे आप का नाम कम आया है।

 

 

 

इमाम अली की फौज मे
जनाबे रूशैद ने इमाम अली (अ.स) की खास फोर्स शुरतातुल खमीस मे रह कर अपने वक़्त के इमाम की खिदमात अंजाम दी।

 

 

 

 

 

 

 

 

सहाबी-ऐ-आइम्मा जनाबे रूशैद
वैसे तो जनाबे रूशैद का शुमार इमाम अली (अ.स) और इमाम हसन (अ.स) के असहाब मे किया जाता है लेकिन शैख़ तूसी ने आपको इमाम हुसैन (अ.स) और इमाम सज्जाद (अ.स) के असहाब मे भी शुमार किया है।

 

राज़दारे इमाम अली
जनाबे रूशैद को इमाम अली (अ.स) के असहाबे मे ये मंज़ीलत हासिल है कि आपको मौला (अ.स) का राज़दार भी शुमार किया जाता है।

 

शार्गिदे इमाम अली
मशहूर इतिहासकार याक़ूबी ने आपको इमाम अली (अ.स) का शार्गिद शुमार किया है और कहा जाता है कि जनाबे रूशैद ने इमाम अली (अ.स) से इल्मे मनाया वल बलाया (मौत और बलाओ के बारे मे एक इल्म) सीखा था।

 

जनाबे रूशैद मासूमीन के कलाम मे
इमाम अली (अ.स) ने आपको रशीदुल बलाया (मुश्किलात मे डट जाने वाला पहलवान) का नाम दिया है।
इमाम काज़िम (अ.स) ने अपने सहाबी इसहाक़ से जनाबे रूशैद के बारे मे फरमायाः ऐ इस्हाक़। रूशैद हजरी दुनिया मे होने वाले वाकेआत और हादेसात और लोगो की मौत और ज़िन्दगी के बारे मे खबर रखते थे।

 

औलाद
जनाबे रूशैद की औलाद के बारे मे इतिहासकार एक बेटी का ज़िक्र करते है कि जिनका नाम क़नवा नक्ल किया गया है और उलामा ने इन्ही से जनाबे रूशैद हजरी की शहादत की खबर को रिवायत किया है।

 

शहादत की मालूमात
इमाम अली (अ.स) ने जनाबे रूशैद हजरी को भी जनाबे मीसम की तरह उनकी शहादत के बारे मे जानकारी दे रखी थी।

 

शहादत
आप की शहादत के बारे मे रिवायत मे मिलता है कि आपको भी जनाबे मीसमे तम्मार की तरह शहीद किया गया।
इब्ने ज़्याद मलऊन ने आपके बारे मे हुक्म दिया कि आपके हाथ-पैरो को काट कर दार पर चढ़ा दिया जाऐ और ज़ालिमो ने अपने ज़ालिम हाकिम के हुक्म पर अमल किया और जनाबे रूशैद इस दारे फानी को छोड़ कर अपनी हक़ीक़ी करारगाह को कूच कर गऐ। सैय्यद मौहसिन अमीन आमिली ने ज़ियाद बिन अबीह को जनाबे रूशैद का कातिल नक्ल किया है जबकि आयतुल्लाह खुई (रहमतुल्लाह अलैह) ने उबैदुल्लाह इब्ने ज़ियाद को आपका क़ातिल क़रार दिया है।

मजारे मुक़द्दस
आपकी क़ब्रे मुबारक इराक़ के शहर किफ्ल मे है कि जहाँ पर रोज़ाना आपके चाहने वाले आपकी ज़ियारत का शरफ हासिल करते है।


source : alhassanain
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