Hindi
Friday 19th of April 2024
0
نفر 0

हज़रत ज़ैनब

हज़रत ज़ैनब



असर दुआ को मिला है जनाबे ज़ैनब से
बहुत क़रीब ख़ुदा है जनाबे ज़ैनब से

 


अली की बेटी ने कलमे की आबरू रख ली
सदाए सल्ले अला है जनाबे ज़ैनब से

 


ज़माना लाख बुझाए बुझ नहीं सकता
चिराग़े दीं की ज़िया है जनाबे ज़ैनब से

 


न हो शिफ़ाअते बिन्ते अली तो कुछ भी नहीं
हयाते अरज़ो समां है जनाबे ज़ैनब से

 


सरों को चादरें बख़्शीं हैं बे रिदा हो कर
वक़ारे फ़र्क़ों रिदा है जनाबे ज़ैनब से

 


अंधेरे शाम की तक़दीर हो नहीं सकते
चिराग़े शाम जला है जनाबे ज़ैनब से

 


वह हाथ गर्दने शब्बीर पर नहीं कांपा
जो हाथ कांप रहा है जनाबे ज़ैनब से

 


जनाबे ज़हरा से बेशक चली है नस्ले नबी
नबीं का दीन चला है जनाबे ज़ैनब से।

0
0% (نفر 0)
 
نظر شما در مورد این مطلب ؟
 
امتیاز شما به این مطلب ؟
اشتراک گذاری در شبکه های اجتماعی:

latest article

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की शहादत
बिना अनुमति के हज करने की कोशिश ...
शिया समुदाय की उत्पत्ति व इतिहास (2)
बक़रीद के महीने के मुख्तसर आमाल
सबसे पहला ज़ाएर
কুরআন ও ইমামত সম্পর্কে ইমাম জাফর ...
दुआ ऐ सहर
आज यह आवश्यक है की आदरनीय पैगम्बर ...
रूहानी लज़्ज़ते
रोज़े की फज़ीलत और अहमियत के बारे ...

 
user comment