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Saturday 24th of February 2024
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रियाद में सऊदी शासन के विरुद्ध प्रदर्शन।

विशेषज्ञों का कहना है कि यमन में आले सऊद के युद्ध पर होने वाले खर्च, बहरैन में आले खलीफ़ा शासन के समर्थन में हस्तक्षेप करने वाले कार्य, क्षेत्र के दूसरे देशों में दंगे करने के लिए रियाद का हस्तक्षेप और इराक़, सीरिया और लेबनान में युद्ध की आग भड़काने के लिए तकफ़ीरी आतंकवादी गुटों के लिए हथियार और आर्थिक समर्थन और साथ ही पश्चिमी देशों विशेष रूप से अमेरिका से अरबों डॉलर के हथियारों की खरीदारी यह वह सारे कारण हैं कि जिनकी वजह से सऊदी अरब को इतने बड़े पैमाने पर बजट में घाटे का सामना है।

अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी अबना: सऊदी अरब की राजधानी रियाद में पिछले चौबीस घंटे में सऊदी नागरिकों ने शाह सलमान और उनके उत्तराधिकारी मुहम्मद बिन सलमान की अर्थव्यवस्था पॉलिसियों के विरुद्ध कई बार प्रदर्शन किए।
रियाद में शाही महल की ओर जाने वाली रोड पर सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन करके टैक्सों में बढ़ोत्तरी और सब्सिटी की समाप्ति पर कड़ा विरोध किया।
सऊदी अरब ने जो दुनिया में तेल निर्यात करने वाला सबसे बड़े देश के रूप में गिना जाता है ऐसे आर्थिक सुधार किए हैं जिसके अंतर्गत पेट्रोलियम सब्सिडी समाप्त कर दी गई है और आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले सामानों पर वेट या वैल्यु एडिट टैक्स लगा दिया गया है।
कहा जा रहा है कि इन सुधारों का उद्देश्य तेल की कीमतों में गिरावट आने के कारण आमदनी में कमी को पूरा करना है जिसकी वजह से दो हज़ार अठ्ठारह के आर्थिक बजट में भी बावन अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यमन में आले सऊद के युद्ध पर होने वाले खर्च, बहरैन में आले खलीफ़ा शासन के समर्थन में हस्तक्षेप करने वाले कार्य, क्षेत्र के दूसरे देशों में दंगे करने के लिए रियाद का हस्तक्षेप और इराक़, सीरिया और लेबनान में युद्ध की आग भड़काने के लिए तकफ़ीरी आतंकवादी गुटों के लिए हथियार और आर्थिक समर्थन और साथ ही पश्चिमी देशों विशेष रूप से अमेरिका से अरबों डॉलर के हथियारों की खरीदारी यह वह सारे कारण हैं कि जिनकी वजह से सऊदी अरब को इतने बड़े पैमाने पर बजट में घाटे का सामना है।
इसके अतिरिक्त तेल की कीमतों में पिछले दो, तीन सालों से जो बड़ी कमी सामने आई है उसका जिम्मेदार स्वंय सऊदी अरब ही है क्योंकि उसने क्षेत्र में प्रतिरोध मोर्चे को कमजोर करने के लिए जान बूझ कर तेल की कीमतें गिराई थीं लेकिन सऊदी अरब की यह पॉलिसी स्वंय उसके लिए उल्टी पड़ी जिसकी अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से तेल के निर्यात पर टिकी हुई है।
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